19-12-2022 “अव्यक्त-बापदादा” मधुबन प्रात: मुरली : “शिवबाबा इस समय तुम्हारे सामने हाज़िर-नाज़िर है”

शिव भगवानुवाच : “मीठे बच्चे – शिवबाबा इस समय तुम्हारे सामने हाज़िर-नाज़िर है, तुम्हें पहले यह निश्चय चाहिए कि हमको पढ़ाने वाला स्वयं शिवबाबा है, कोई देहधारी नहीं” 

प्रश्नःबाप से कौन सा प्रश्न पूछना भी जैसे बाप की इन्सल्ट है?

उत्तर:- बच्चे बाप से पूछते हैंबाबा आपकी इस तन में पधरामणी कब तक है वा विनाश कब होगा? बाबा कहतेयह जैसे तुम मेरी इन्सल्ट करते हो। मेहमान से पूछना कि आप बाकी कितने दिन रहेंगे? यह तो इन्सल्ट हुई ना! कहेंगे क्या मैं तुम्हारे लिए बोझ हो पड़ा हूँ। शिवबाबा तो जब तक यहाँ हैतब तक तुम बच्चे खुश हो ना इसलिए ऐसे प्रश्न बाप से नहीं पूछने चाहिए।

गीत:- “ओम् नमो शिवाए………..!”, , अन्य गीत सुनने के लिए सेलेक्ट करे > “PARAMATMA LOVE SONGS”.

Shiv God Supreem, परमपिता परमात्मा शिव
Shiv God Supreem, परमपिता परमात्मा शिव

-: ज्ञान के सागर और पतितपावन निराकार शिव भगवानुवाच :-

अपने रथ प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा सर्व ब्राह्मण कुल भूषण ब्रह्मा मुख वंशावली ब्रह्माकुमार कुमारियों प्रति – “मुरली( यह अपने सब बच्चों के लिए “स्वयं भगवान द्वारा अपने हाथो से लिखे पत्र हैं।”)

ओम् शान्ति

शिव भगवानुवाच : बाप बैठकर ब्रह्मा द्वारा अपने बच्चों, ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारियों को समझाते हैं। ब्रह्माकुमार कुमारियाँ भी समझते हैं कि निराकार बाप ब्रह्मा द्वारा समझा रहे हैं। बाप तो है निराकार। किसको साक्षात्कार भी कराना होगा तो ब्रह्मा का शरीर ही सामने करूँगा। अगर खुद का साक्षात्कार कराये तो कोई समझ सके। वह तो एक बिन्दी है।

अब जैसे आत्मा स्टार है, वैसे परमात्मा भी बिन्दी है। यह बुद्धि से समझा जाता है। भल साक्षात्कार हो भी, चीज़ तो वही देखेंगे और क्या चीज़ हो सकती है। अक्सर करके बहुतों को ब्रह्मा का साक्षात्कार कराते हैं कि इनके पास जाओ। छोटी चीज़ को कोई समझ सकें। ब्रह्मा द्वारा बाप बैठ समझाते हैं, नॉलेज देते हैं। कहते हैंबच्चों मैं इस साधारण मनुष्य तन का आधार लेता हूँ। ब्रह्मा तो नामीग्रामी है। समझेंगे बाबा इसमें है।

यह बाबा का रथ है। बाबा नहीं होता तो यह ब्रह्मा भी काहे का। तो यह बी.के. भी काहे के। बच्चों को नॉलेज मिलती है। तुम समझते हो यह नॉलेज सिवाए परमपिता परमात्मा के कोई दे नहीं सकते। नॉलेजफुल वह निराकार है। सिवाए आरगन्स के ज्ञान दे कैसे सकते? बच्चों को यह निश्चय हो जाना चाहिए कि इस समय बाबा हाज़िर नाज़िर है। बुद्धि कहती है बाबा इसमें प्रवेश है, जो बैठ नॉलेज देते हैं। उस परमपिता परमात्मा के सिवाए स्वर्ग का वर्सा मिल न सके।

(Below)BK Brahma Baba (Father) and (Above)Shiv Baba (Grand father), (निचे) ब.क. ब्रह्मा बाबा (बाप) और (ऊपर) शिव बाबा (दादा)
(Below)BK Brahma Baba (Father) and (Above)Shiv Baba (Grand father), (निचे) ब.क. ब्रह्मा बाबा (बाप) और (ऊपर) शिव बाबा (दादा)

तुम बच्चे जानते हो भक्ति मार्ग में जो भी त्योहार आदि मनाये जाते हैं वो सब इस समय के ही यादगार हैं। शिव जयन्ति भी इस समय का ही त्योहार है। त्रिमूर्ति शिव, परमपिता परमात्मा ब्रह्मा द्वारा स्थापना करते हैं। श्रीकृष्ण थोड़ेही नई दुनिया की स्थापना करेंगे। ब्राह्मण कुल चला आता है। उनको यह पता नहीं कि ब्राह्मण सो देवता बन जाते।

ब्रह्मा की औलाद तुम ब्राह्मण हो। जो भी मनुष्य मात्र हैं, सब धर्म वाले उन्हों को समझ में आता है कि हमारा ग्रेटग्रेट ग्रैण्ड फादर ब्रह्मा है, जिसको आदमबीबी अथवा आदि देव, आदि देवी कहते हैं। वह भी शिवबाबा की रचना है। बाबा ने रचना कैसे रची? एडाप्ट किया। यह है पहले नम्बर की बात। अल्फ के बाद फिर बे। इन बातों को जो अच्छी रीति समझते हैं वही ऊंच पद पाते हैं।

अभी तुम बच्चे समझते हो मनुष्य कितना घोर अन्धियारे में हैं। कल्प पहले भी जब आग लगी थी तब जगे थे। वह सीन फिर होगी। होना भी जरूर है। दूसरे धर्म वाले इन बातों को समझेंगे नहीं, पुरुषार्थ करेंगे। सतयुग में तो इतने मनुष्य सकें। वहाँ बहुत थोड़े होंगे, जो सूर्यवंशी घराने में राज्य करेंगे। सब ड्रामा के बंधन में बांधे हुए हैं। बाप खुद कहते हैं मैं भी ड्रामा के बंधन में बांधा हुआ हूँ। कोई बात का रेस्पान्ड ड्रामा में होगा तो बताऊंगा। ड्रामा का सारा राज़ अभी थोड़ेही बताऊंगा। मेरे में भी पार्ट नूँधा हुआ है।

जैसे इमर्ज होता जाता है, तुमको समझाता जाता हूँ। सब कुछ ड्रामा अनुसार ही चलता है, उसमें फ़र्क नहीं पड़ सकता। ड्रामा में नहीं होता तो रेसपान्ड करेंगे नहीं। ऐसे नहीं कि अभी बता दूँगा कि बाकी इतने वर्ष हैं। बाबा से पूछते हैंबाबा कब तक इस शरीर में मुसाफिरी करेंगे? बतायेंगे नहीं। ड्रामा में है नहीं तो क्या कर सकते। ड्रामा में होगा तो बतायेंगे। मैं आया ही हूँ तुम बच्चों को पढ़ाने।

Shiv God Supreem, परमपिता परमात्मा शिव
Shiv God Supreem, परमपिता परमात्मा शिव

मैं तुम्हारा बाप भी हूँ। तुम गाते हो तुम मातपितावही पार्ट बजा रहा हूँ। मेरा फ़र्ज है तुमको शिक्षा देना। मुझे कहते हैं ज्ञान का सागर, मनुष्य सृष्टि का बीजरूप। चैतन्य बीज तो सब कुछ बतायेगा ना। इस झाड़ पर बनेनट्री का मिसाल दिया जाता है। तुम देखते हो देवीदेवता धर्म अभी है नहीं। बाकी सब धर्म हैं। अभी यह सब खलास हो जायेंगे। फिर अपने समय पर आकर स्थापना करेंगे।

मैं देवता धर्म की स्थापना कर रहा हूँ। जब वह धर्म प्राय:लोप है, चित्र हैं। परन्तु यह किसको पता नहीं कि देवीदेवता धर्म कब था। कहाँ गुम हो गया। सिर्फ कहेंगे लक्ष्मीनारायण का राज्य था। यह शास्त्र आदि सब भक्ति के लिए हैं। द्वापर में बैठ यह शास्त्र आदि बनायेंगे। सचखण्ड में सिर्फ देवता राज्य करते थे। यह है ही झूठ खण्ड। वहाँ तो कोई भी पाप नहीं होता। अभी बाप तुमको पुण्य आत्मा बना रहे हैं। ड्रामा में नूँध है।

रावणराज्य में ही भक्ति, शास्त्र आदि शुरू होते हैं। यह अनादि ड्रामा शूट हुआ पड़ा है। यह है ही झूठी दुनिया। ईश्वर के लिए भी झूठ ही झूठ बोलते हैं। ईश्वर तो ऊंच ते ऊंच है, हम उनसे मिलने चाहते हैं तो जरूर उनसे कुछ मिलता है। बाप से क्या मिलेगा? वह है सर्व का सद्गति दाता। सर्व को दु: से छुड़ाते हैं। रावण भी बड़ा जबरदस्त है। आधाकल्प उनका राज्य चलता है। परन्तु वह दु:ख देते हैं इसलिए सब मनुष्य बाप को याद करते हैं।

रावण तुम्हारी सारी राजधानी छीन लेता है, इतना जबरदस्त है। अब तुमको मालूम पड़ा हैबाप हमको वर्सा देते हैं, रावण श्राप देते हैं। मनुष्यों को यह पता नहीं है कि बाप कब वर्सा देते हैं। श्रीकृष्ण का नाम गीता में डालने से गीता को झूठा कर दिया है। बड़े ते बड़ी भूल यह है।

पिताश्री ब्रहमा परमात्मा ज्ञान देरहे ,Father Brahma teaching Godly Verses
पिताश्री ब्रहमा परमात्मा ज्ञान देरहे ,Father Brahma teaching Godly Verses

यह बाबा भी तो नारायण का पक्का भगत था, गीता पढ़ता था। गीता पढ़ने बिगर कोई काम नहीं करता था। जब साक्षात्कार हुआ निश्य हो गया कि बाप हमको यह (लक्ष्मीनारायण) का वर्सा देते हैं। अभी तो बहुत कुछ समझ में गया है, शिवबाबा समझाते रहते हैं। कभी कोई शास्त्र नहीं उठाया। बाबा सुना रहा है। यह भी कहते हैंमैं सुन रहा हूँ। कभी बाबा नहीं है तो यह भी सुनाते हैं। इसमें बाबा है, इसलिए ब्रह्मा का नाम इतना नहीं है। अजमेर में एक मन्दिर बनाया है, परन्तु कुछ समझते नहीं हैं। श्रीकृष्ण को मुरली दी और सरस्वती को सितार दी है। सरस्वती को गॉडेज आफ नॉलेज कहा जाता है। गॉड आफ नॉलेज ब्रह्मा के बदले श्रीकृष्ण को कह दिया है। मूँझ गये हैं।

बाप बैठ बच्चों को समझाते हैं त्रिमूति में श्रीकृष्ण तो है नहीं। भल करके है परन्तु गुप्त। राधेकृष्ण ही लक्ष्मीनारायण बनते हैं, यह भी किसको पता नहीं है कि परमपिता परमात्मा ने समझाया था। अब भी समझाते रहते हैं। साधूसन्त आदि इस बात को समझ जायें तो यहाँ सबकी भीड़ मच जाये। परन्तु ड्रामा में ऐसे भी नहीं है।

बाप कहते हैंमैं संगम पर आकर राजयोग सिखाता हूँ, जो पास होते हैं वह सूर्यवंशी बनते हैं, जो फेल होते हैं वह चन्द्रवंशी बनते हैं। सूर्यवंशी की प्रजा सूर्यवंशी होगी, चन्द्रवंशी की प्रजा चन्द्रवंशी होगी। तुम बच्चों की बुद्धि में सारे चक्र का ज्ञान है। तुम हो स्वदर्शन चक्रधारी ब्राह्मण। यह है सर्वोत्तम ब्राह्मण कुल। तुम सेवाधारी हो। तुम गुप्त वेश में भारत को योगबल से स्वर्ग बनाते हो। तुम्हारे लिए स्वर्ग जरूर चाहिए। पुरानी दुनिया को खत्म करना पड़े।

Sangam Yug Avinashi Gyan Yagna, संगम युग अविनाशी ज्ञान यग
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श्रीमत पर तुम अपनी राजधानी स्थापन कर रहे हो। यादवों की राजाई खत्म होनी है। पाण्डव राजाई स्थापन कर रहे हैंनई दुनिया के लिए। पुराने भंभोर को आग लगनी है। यह भी समझते होबाकी कितने दिन होंगे? बहुत थोड़े। बाकी कितना समय है? यह हम पूछ नहीं सकते। मेहमान से पूछा नहीं जाता है, आप कितने दिन रहेंगे? कहेंगे मैं शायद बोझ हूँ।

शिवबाबा कहते हैंमैं यहाँ हूँ तो तुम खुश रहते हो ना। फिर पूछते क्यों हो कि कब तक पधरामनी है? यह पूछना भी जैसे इन्सल्ट है, इसमें भी लज्जा आनी चाहिए। यह पूछना तो ऐसे हुआ कि बाबा जल्दी जाये तो अच्छा इसलिए ऐसेऐसे सवाल बाबा से पूछ भी नहीं सकते। ऐसा बाप तो कोई हो सके। बच्चे ही बाप को जान गये हैं। श्रीकृष्ण के लिए ऐसे नहीं कहेंगे कि इसमें परमात्मा है। श्रीकृष्ण ही याद आता रहेगा। परमात्मा तो याद सके। श्रीकृष्ण को ही देखते रहेंगे। शिव को याद ही करें इसलिए तुम बच्चों को समझाया गया है कि शिवबाबा को याद करो। देह-अभिमान में नहीं रहना है। श्रीकृष्ण की महिमा कोई कम नहीं है।

बाप कहते हैं मुझे आना ही है पराये देश, पुराने शरीर में। श्रीकृष्ण तो रावण के देश में सके। अब तुम जानते हो कि श्रीकृष्ण की आत्मा पुनर्जन्म लेतेलेते अब इस शरीर में है। यह अन्तिम शरीर है। यही फिर नम्बरवन पावन शरीर बनता है। यह सब बातें और कोई की बुद्धि में सकें। रावण का चित्र बनाते हैं परन्तु समझते नहीं हैं कि रावण की प्रवेशता कब से हुई है? जलाते ही आते हैं। मर जाये तो फिर जलाना बन्द कर दें, मरता नहीं। हर वर्ष जलाते हैं। यह सब है भक्ति मार्ग।

बाप कहते हैं मैंने तुमको सूर्यवंशी, चन्द्रवंशी बनाया। तुम फिर शूद्र वंशी बने कैसे? अब फिर तुमको सूर्यवंशी, चन्द्रवंशी बना रहा हूँ। अभी तुम जानते हो हम विश्व पर जीत पाते हैं फिर हार खाते हैं। जब देवीदेवता धर्म था तो और कोई धर्म नहीं था। अब फिर वह धर्म स्थापन होगा तो और सब धर्म खत्म हो जायेंगे। आसार भी तुमको देखने में आयेंगे।

84 जन्मों कि सीढ़ी , Ladder of 84 Human Births
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कितना साइन्स का काम चल रहा है। खुशी भी मनाते हैं। ऐसा एरोप्लेन निकलेगा जो 3-4 घण्टे में लन्दन पहुँचायेगा। आजकल एरोप्लेन में हाथी, बन्दर, मेढक सब जाते हैं। यह सुख के लिए भी हैं तो दु:ख के लिए भी हैं। वहाँ विमान में घूमते हैं।

अभी तुम ऊंची तकदीर बनाने के लिए आये हो। तुम सो देवीदेवता बन रहे हो। स्वर्ग का नाम गाते हैं परन्तु जानते नहीं कि स्वर्ग कब था? कहते हैं स्वर्ग पधारा तो जरूर नर्क में था। परन्तु सीधा कहो तुम नर्कवासी हो तो गुस्सा लगेगा। अब तुम्हारे में ताकत है। तुम कह सकते हो तुम पतितपावन को बुलाते हो तो जरूर पतित हो।

बाप कहते हैंअब झाड़ जड़जड़ीभूत अवस्था को पाया हुआ है। महाभारी लड़ाई मशहूर है। तुम जानते हो हम आये हैं राजाई लेने। हम स्थापना के निमित्त हैं। आगे चल यह संन्यासी, महात्मायें भी तुम्हारी बात मानेंगे, यह सब ड्रामा में नूँध है। अच्छा!

मीठेमीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मातपिता बापदादा का यादप्यार और गुडमार्निग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते। ओम् शान्ति।

धारणा के लिए मुख्य सार :-

1) गुप्त रूप में योगबल से भारत को स्वर्ग बनाने की सेवा करनी है, रूहानी सेवाधारी बनना है।

2) हमारा सर्वोत्तम ब्राह्मण कुल है, हम स्वदर्शन चक्रधारी हैं। इस नशे में रहना है। किसी भी बात में संशय नहीं उठाना है।

वरदान:-        परमात्म चिंतन के आधार पर सदा बेफिक्र रहने वाले निश्चयबुद्धि, निश्चिंत भव

दुनिया वालों को हर कदम में चिंता है और आप बच्चों के हर संकल्प में परमात्म चिंतन है इसलिए बेफिक्र हो। करावनहार करा रहा है आप निमित्त बन करने वाले हो, सर्व के सहयोग की अंगुली है इसलिए हर कार्य सहज और सफल हो रहा है, सब ठीक चल रहा है और चलना ही है। कराने वाला करा रहा है हमें सिर्फ निमित्त बन तनमनधन सफल करना है। यही है बेफिक्र, निश्चिंत स्थिति।

स्लोगन:-       “सदा सन्तुष्टता का अनुभव करना है तो सबकी दुआयें लेते रहो। ओम् शान्ति।

मधुबन मुरली:- सुनने के लिए Video को सेलेक्ट करे।  

अच्छा – ओम् शान्ति।

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नोट: यदि आपमुरली = भगवान के बोल को समझने में सक्षम नहीं हैं, तो कृपया अपने शहर या देश में अपने निकटतम ब्रह्मकुमारी राजयोग केंद्र पर जाएँ और परिचयात्मक “07 दिनों की कक्षा का फाउंडेशन कोर्स” (प्रतिदिन 01 घंटे के लिए आयोजित) पूरा करें।

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