“याद का तैलुक (सम्बन्ध) है ज्ञान से, ज्ञान के बिना याद यथार्थ नहीं रह सकती”

मातेश्वरी जी के अनमोल महावाक्य –

पहले-पहले मनुष्य को अपनी सुखी जीवन बनाने के लिये कौनसी मुख्य प्वाइन्ट बुद्धि में रखनी है? पहले तो यह मुख्य बात समझनी है कि जिस परमात्मा बाप की हम संतान हैं, उस बाप की याद में हर समय श्वांसो श्वांस उपस्थित रहें, उस अभ्यास में रहने की पूर्ण रीति से कोशिश करनी है।

परमात्मा शिव की याद में मनुष्य आत्मा, Human Soul In God Shiv rememberence
परमात्मा शिव की याद में मनुष्य आत्मा, Human Soul In God Shiv rememberence

अब श्वांसों श्वांस का मतलब है लगातार बुद्धियोग लगा रहे, जिसको निरंतर योग, अटूट अजपाजाप याद कहा जाता है, यह कोई मुख से जपने वाली याद नहीं है और न कोई मूर्ति सामने रख उसका ध्यान करना है।

परन्तु यह बुद्धियोग द्वारा याद रखनी है, अब वो याद भी निरन्तर तब रह सकेगी जब परमात्मा का पूरा परिचय हो, तब ही ध्यान पूर्ण लग सकेगा। परन्तु परमात्मा तो गीता में साफ कहते हैं, न मैं ध्यान से, न जप से मिलता हूँ और न मेरी सूरत को सामने रख उनका ध्यान करना है

परन्तु ज्ञान योग द्वारा परमात्मा को पाना है इसलिए पहले चाहिए ज्ञान, ज्ञान बिगर याद कायम रह नहीं सकेगी। याद का तैलुक है ही ज्ञान से। अब ज्ञान से, चाहे मन से कल्पना करें वा बैठकर दर्शन करें अगर उस देखी हुई चीज़ का भी पहले ज्ञान होगा तब ही योग और ध्यान ठीक लग सकता है इसलिए परमात्मा कहते हैं मैं कौन हूँ, मेरे साथ कैसे योग लगाना है, उसका भी ज्ञान चाहिए। ज्ञान के लिये फिर पहले संग चाहिए, अब यह सब ज्ञान की प्वाइन्ट बुद्धि में रखनी है तब ही योग ठीक लग सकेगा।

अच्छा – ओम् शान्ति।

SOURSE: 11-4-2022 प्रात: मुरली ओम् शान्ति ”अव्यक्त-बापदादा” मधुबन.

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