“जिस समय “ओम् शान्ति” कहते हैं तो उसका यथार्थ अर्थ है?”
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मातेश्वरी जी के अनमोल महावाक्य:-
जिस समय “ओम् शान्ति” कहते हैं तो उसका यथार्थ अर्थ है मैं आत्मा सालिग्राम उस ज्योति स्वरूप परमात्मा की संतान हूँ, हम भी वही पिता ज्योतिर्बिन्दू परमात्मा के मुआफिक आकार वाली हैं।
बाकी हम सालिग्राम बच्चे हैं तो इन्हों को अपने ज्योति स्वरूप परमात्मा के साथ योग रखना और लाइट माइट का वर्सा लेना है। उस निराकार परमात्मा को श्वांसों श्वांस याद करना इसको ही अजपाजाप कहा जाता है। अजपाजाप माना कोई भी मंत्र जपने के सिवाए नेचुरल उस परमात्मा की याद में रहना, इसको ही पूर्ण योग कहते हैं, योग का मतलब है एक ही योगेश्वर परमात्मा की याद में रहना।
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तो जो आत्मायें उस परमात्मा की याद में रहती हैं, उन्हों को योगी अथवा योगिनियां कहा जाता है। जब उस योग अर्थात् याद में निरंतर रहें तब ही विकर्मों और पापों का बोझ नष्ट होता है और आत्मायें पवित्र बन भविष्य जन्म में देवताई प्रालब्ध पाती हैं। अब यह नॉलेज चाहिए तब ही योग पूरा लग सकता है।
“तो अपने को आत्मा समझ परमात्मा की याद में रहना, यह है सच्चा ज्ञान।“
अच्छा – ओम् शान्ति।
स्रोत : 15-10-2022 प्रात: मुरली ओम् शान्ति ”अव्यक्त-बापदादा” मधुबन.
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