“दादी प्रकाशमणि जी के 14 वें पुण्य स्मृति दिवस पर दादी जी द्वारा मिली हुई अनमोल सौगात”

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1- ईश्वरीय नियम और मर्यादायें हमारे जीवन का सच्चा श्रंगार हैं, इन्हें अपने जीवन में धारण कर सदा उन्नति करते रहना।

2- सदा यही नशा रखो कि हम भगवान के नयनों के नूर हैं, भगवान के नयनों में छिपकर रहो तो माया के आंधी तूफान स्थिति को हिला नहीं सकेंगे। सदा बाबा की छत्रछाया के नीचे रहो तो रक्षक बाबा सदा रक्षा करता रहेगा।

3- हम सबका दिलबर और रहबर एक बाबा है उससे ही दिल की लेन-देन करना, कभी किसी देहधारी को दोस्त बनाकर उसके साथ व्यर्थ-चिंतन और परचिंतन नहीं करना।

4- चेहरे पर कभी उदासी, घृणा वा नफरत के चिन्ह न आयें। सदा खुश रहो और खुशी बांटते चलो। अपने सेन्टर का वातावरण ऐसा खुशनसीबी का बनाओ जो हरेक को खुशनसीब बना दे।

5- जितना अन्तर्मुखी बन मुख और मन का मौन धारण करेंगे उतना स्थान का वायुमण्डल लाइट माइट सम्पन्न बनेगा और आने वालों पर उसका प्रभाव पड़ेगा, यही सूक्ष्म सकाश देने की सेवा है।

6- कोई भी कारण वश मेरे तेरे में आकर आपसी मतभेद में नहीं आना। आपसी मनमुटाव यही सेवाओं में सबसे बड़ा विघ्न है, इस विघ्न से अब मुक्त बनो और बनाओ।

7- एक दो के विचारों को सम्मान देकर हर एक की बात पहले सुनो फिर निर्णय करो तो दो मतें नहीं होंगी। हर एक छोटे बड़े को रिसपेक्ट जरूर दो।

8- अब बाबा के सभी बच्चे सन्तुष्टता की ऐसी खान बनो जो आपको देखकर हर एक सन्तुष्ट हो जाए। सदा सन्तुष्ट रहो और दूसरों को भी सन्तुष्ट करो।

9- चार मन्त्र सदा याद रखना – एक कभी अलबेला नहीं बनना, सदा अलर्ट रहना। दूसरा – किसी से भी घृणा नहीं करना सबके प्रति शुभ भावना रखना। तीसरा – किसी से भी ईर्ष्या (रीस) नहीं करना, उन्नति की रेस करना। चौथा – कभी किसी भी व्यक्ति, वस्तु वा वैभव पर प्रभावित नहीं होना, सदा एक बाबा के ही प्रभाव में रहना।

10- हम सब रॉयल बाप के रॉयल बच्चे हैं, सदा स्वयं में रायॅल्टी और पवित्रता के संस्कार भरना, गुलामी के संस्कारों से मुक्त रहना। सत्यता को कभी नहीं छोड़ना।

11- हर एक रोज़ हर घण्टे पाँच मिनट भी साइलेन्स की अनुभूति जरूर करो तो अनेक बातों पर विजय पाने की शक्ति आयेगी। माया पर विजय तब होगी जब ज्ञान सहित योग में रहेंगे।

12- सेवा के साथ-साथ स्व-स्थिति एकरस रहे, उसके लिए योग की भट्ठी बहुत जरूरी है, इसमें सभी को संगठन में बैठकर अभ्यास करना चाहिए। तो संगठन का भी बल मिलता है।

13- आपके चेहरे पर कभी उदासी, घृणा, ऩफरत के चिन्ह दिखाई न दें। अगर आपस में कोई 19-20 बात हो जाए तो अपनी तपस्या से उसको मिटाओ। एक दो के आगे वर्णन नहीं करो। वर्णन करने से वायुमण्डल खराब हो जाता है।

14- कोई कितना भी मन खराब करने की कोशिश करे, लेकिन उसके प्रभाव में कभी नहीं आना। संगदोष भी बहुत खराब होता, जो बुद्धि को बदल देता है। सबसे प्यार करो सब फ्रैन्ड्स हैं, लेकिन पर्सनल फ्रैन्ड किसी को नहीं बनाओ। यह अण्डरलाइन करो।

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